क्या आपने अभी-अभी विदेश में नौकरी शुरू की है और भारत में पड़े अपने पुराने सेविंग्स अकाउंट को लेकर उलझन में हैं कि उसका क्या करें? या फिर आप एक NRI हैं और भारत में मिलने वाले किराए, पेंशन या FD के ब्याज पर टैक्स और उसे विदेश भेजने के नियमों को लेकर परेशान हैं? इन ज़्यादातर सवालों की जड़ में एक ही उलझन होती है — NRE Account और NRO Account में आखिर फर्क क्या है और कौन-सा अकाउंट कब खोलना चाहिए। Reserve Bank of India (RBI) के नियमों के तहत कोई भी Non-Resident Indian (NRI) भारत में मुख्य रूप से तीन तरह के अकाउंट खोल सकता है — NRE, NRO और FCNR(B)। इनमें NRE और NRO सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले रुपी अकाउंट हैं, लेकिन दोनों का मकसद, टैक्स नियम और पैसा वापस विदेश भेजने (repatriation) के नियम बिल्कुल अलग-अलग हैं। गलत अकाउंट में गलत पैसा जमा करना FEMA के नियमों का उल्लंघन बन सकता है और टैक्स नोटिस तक की नौबत ला सकता है।
इस लेख में हम RBI के Master Direction – Deposits and Accounts (अद्यतन 29 जून 2026), RBI की आधिकारिक FAQ, और आयकर विभाग (incometax.gov.in) के दस्तावेज़ों के आधार पर NRE बनाम NRO अकाउंट का पूरा और नवीनतम तुलनात्मक विश्लेषण करेंगे — जिसमें 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए Income-tax अधिनियम, 2025 के मुताबिक अपडेटेड नियम भी शामिल हैं।
NRI कौन होता है? (आधिकारिक परिभाषा)
NRE या NRO अकाउंट खोलने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि "NRI" की परिभाषा कानूनन कैसे तय होती है, क्योंकि यहीं सबसे ज़्यादा भ्रम होता है। बैंक अकाउंट से जुड़े सभी नियम FEMA (Foreign Exchange Management Act), 1999 के तहत तय होते हैं — Income Tax Act के तहत नहीं।
FEMA की धारा 2(w) के अनुसार, "person resident outside India" वह व्यक्ति है जो धारा 2(v) के तहत "भारत में निवासी" नहीं है। धारा 2(v) के मुताबिक, कोई व्यक्ति भारत का निवासी तभी माना जाता है जब वह पिछले वित्त वर्ष में 182 दिन से ज़्यादा भारत में रहा हो। लेकिन इसमें एक अहम अपवाद है: अगर कोई व्यक्ति रोज़गार, व्यापार या किसी ऐसी वजह से भारत छोड़ता है जिससे यह ज़ाहिर हो कि वह अनिश्चित अवधि के लिए विदेश में रहने वाला है, तो वह उसी दिन से "person resident outside India" मान लिया जाता है — भले ही उसने उस वित्त वर्ष में 182 दिन से ज़्यादा भारत में बिताए हों। इसी आधार पर, RBI के आधिकारिक Master Direction में साफ लिखा है: "A 'Non-resident Indian' (NRI) is a person resident outside India who is a citizen of India." यानी NRI वह भारतीय नागरिक है जो FEMA के तहत भारत का निवासी नहीं है।
इसके अलावा एक और अहम श्रेणी है — Person of Indian Origin (PIO)। RBI के मुताबिक PIO वह व्यक्ति है जो बांग्लादेश या पाकिस्तान (या केंद्र सरकार द्वारा तय किसी और देश) को छोड़कर किसी अन्य देश का नागरिक है, और जो खुद कभी भारत का नागरिक रहा हो, या जिसके माता-पिता/दादा-दादी/परदादा-परदादी भारतीय नागरिक रहे हों, या जो किसी भारतीय नागरिक अथवा उपरोक्त श्रेणी के व्यक्ति का जीवनसाथी हो। OCI (Overseas Citizen of India) कार्डधारक भी PIO की श्रेणी में शामिल माने जाते हैं।
एक ज़रूरी बात समझ लें: FEMA वाली "निवासी स्थिति" और Income Tax Act वाली "residential status" दोनों अलग-अलग कानूनों से तय होती हैं और हमेशा एक जैसी नहीं होतीं। आयकर विभाग की आधिकारिक FAQ के अनुसार, नए Income-tax अधिनियम, 2025 (1 अप्रैल 2026 से लागू) की धारा 6 में भी वही 182 दिन, और वैकल्पिक रूप से 60+365 दिन वाला टेस्ट बरकरार है जो पुराने Income Tax Act, 1961 की धारा 6(1) में था — लेकिन यह टेस्ट सिर्फ टैक्स देयता तय करने के लिए है, बैंक अकाउंट की योग्यता के लिए नहीं। इसलिए हो सकता है कि कोई व्यक्ति टैक्स के लिहाज़ से "resident" बन जाए, लेकिन FEMA के लिहाज़ से अब भी "non-resident" ही बना रहे। बैंक अकाउंट के लिए हमेशा FEMA वाली परिभाषा ही लागू होती है, Income Tax वाली नहीं।
NRE Account क्या है?
NRE का पूरा नाम है Non-Resident External Rupee Account। यह एक रुपी-डिनॉमिनेटेड अकाउंट है जिसमें NRI अपनी विदेशी कमाई (सैलरी, बिज़नेस इनकम आदि) भारत में लाकर जमा करते हैं। RBI के Master Direction के अनुसार, NRE अकाउंट सिर्फ NRI और PIO ही खोल सकते हैं। इसे Savings, Current, Recurring या Fixed Deposit — किसी भी रूप में रखा जा सकता है। NRE Fixed Deposit की अवधि आमतौर पर 1 से 3 साल के बीच रखी जाती है, हालांकि बैंक अपनी Asset-Liability नीति के अनुसार 3 साल से ज़्यादा अवधि की FD भी स्वीकार कर सकते हैं।
NRE अकाउंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जमा मूलधन (principal) और उस पर मिलने वाला ब्याज, दोनों पूरी तरह Repatriable हैं — यानी बिना किसी अधिकतम सीमा के विदेश वापस भेजे जा सकते हैं। साथ ही, NRE अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज Income Tax से पूरी तरह मुक्त है, और जमा राशि Wealth Tax से भी मुक्त है — यह प्रावधान RBI के Master Direction में स्पष्ट रूप से दर्ज है।
NRE अकाउंट में क्रेडिट के तौर पर क्या-क्या जमा हो सकता है? विदेश से इनवर्ड रेमिटेंस, अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज, अन्य NRE/FCNR(B) अकाउंट से ट्रांसफर, और उन निवेशों की मैच्योरिटी राशि जो इसी अकाउंट से या इनवर्ड रेमिटेंस से की गई हो। किराया, डिविडेंड या पेंशन जैसी "करंट इनकम" भी तभी NRE अकाउंट में जमा हो सकती है जब बैंक (Authorised Dealer) इस बात से संतुष्ट हो कि उस पर लागू टैक्स काटा/जमा किया जा चुका है। एक बात हमेशा याद रखें: जिस दिन कोई व्यक्ति नौकरी या स्थायी निवास के लिए भारत लौटता है और उसकी FEMA के तहत निवासी स्थिति बदल जाती है, उसी दिन से उसे अपना NRE अकाउंट Resident Account में बदलवाना होता है, या फिर उसे RFC (Resident Foreign Currency) अकाउंट में ट्रांसफर करना होता है — यह RBI का स्पष्ट निर्देश है, कोई वैकल्पिक सुझाव नहीं।
NRO Account क्या है?
NRO का पूरा नाम है Non-Resident Ordinary Rupee Account। यह उन NRI के लिए है जिनकी भारत में पहले से कोई इनकम मौजूद है — जैसे किराया, पेंशन, डिविडेंड, बैंक FD का ब्याज, या भारत में संपत्ति बेचने से मिली रकम।
RBI के Master Direction के मुताबिक, NRO अकाउंट किसी भी "person resident outside India" द्वारा खोला जा सकता है — यह प्रावधान NRE से थोड़ा व्यापक है, क्योंकि इसमें सिर्फ NRI और PIO ही नहीं, बल्कि भारत आने वाले विदेशी नागरिक भी बोना-फाइड रुपी लेनदेन के लिए यह अकाउंट खोल सकते हैं। ध्यान रहे: जब कोई resident भारतीय NRI बनता है, तो उसके मौजूदा Resident Savings Account को भी NRO Account के रूप में दोबारा designate कराना अनिवार्य होता है — यह नियम अक्सर लोग भूल जाते हैं या टाल देते हैं।
NRO अकाउंट भी Savings, Current, Recurring और Fixed Deposit के रूप में खोला जा सकता है। इसमें इनवर्ड रेमिटेंस के साथ-साथ भारत में मिलने वाली सभी वाजिब (legitimate) आय जमा की जा सकती है। टैक्स के मामले में NRO अकाउंट NRE से पूरी तरह अलग है — इस पर मिलने वाला ब्याज और अन्य आय पूरी तरह टैक्सेबल है, और बैंक उस पर स्रोत पर कर कटौती यानी TDS करते हैं। पैसा विदेश भेजने के मामले में भी NRO पर सीमाएं लागू होती हैं, जिनकी पूरी जानकारी हम आगे "Repatriation Rules" सेक्शन में देंगे।
NRE vs NRO Account: मुख्य अंतर (Comparison Table)
नीचे दी गई तालिका में RBI की आधिकारिक FAQ (Accounts in India by Non-residents) के आधार पर दोनों अकाउंट के मुख्य अंतर एक नज़र में दिए गए हैं:
| विशेषता | NRE Account | NRO Account |
|---|---|---|
| पूरा नाम | Non-Resident External Rupee Account | Non-Resident Ordinary Rupee Account |
| कौन खोल सकता है | सिर्फ NRI और PIO | कोई भी Person Resident Outside India (NRI, PIO, विदेशी नागरिक भी) |
| पैसे का स्रोत | विदेशी कमाई / इनकम | भारत में अर्जित इनकम (किराया, पेंशन, डिविडेंड, प्रॉपर्टी सेल आदि) |
| मुद्रा | भारतीय रुपया (INR) | भारतीय रुपया (INR) |
| Repatriability | पूर्णतः Repatriable — मूलधन व ब्याज दोनों, कोई सीमा नहीं | सीमित — अधिकतम USD 1 मिलियन प्रति वित्त वर्ष, शर्तों सहित |
| टैक्स | ब्याज पूर्णतः टैक्स-फ्री (Income-tax अधिनियम 2025 की Schedule IV) | ब्याज व अन्य आय पूर्णतः टैक्सेबल, TDS लागू |
| जॉइंट अकाउंट | अन्य NRI/PIO के साथ, या resident relative के साथ (Power of Attorney आधार पर संचालन) | अन्य NRI/PIO के साथ, या resident के साथ 'former or survivor' आधार पर |
| अकाउंट के प्रकार | Savings, Current, Recurring, Fixed Deposit | Savings, Current, Recurring, Fixed Deposit |
| ब्याज दर की सीमा | सामान्यतः तुलनीय घरेलू टर्म डिपॉज़िट दर से अधिक नहीं (कुछ अस्थायी छूट संभव) | resident अकाउंट जैसी सामान्य दरें |
| भारत लौटने पर | तुरंत Resident या RFC अकाउंट में बदलना अनिवार्य | Resident अकाउंट में बदलना अनिवार्य |
Tax Rules: NRE और NRO पर टैक्स के नियम
टैक्स के लिहाज़ से NRE और NRO अकाउंट में ज़मीन-आसमान का फर्क है।
NRE Account: इस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री है। यह छूट पहले पुराने Income Tax Act, 1961 की धारा 10(4)(ii) के तहत मिलती थी। आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (incometax.gov.in) पर उपलब्ध FAQ के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से लागू नए Income-tax अधिनियम, 2025 में भी यह छूट पूरी तरह बरकरार रखी गई है, और अब इसे अधिनियम की Schedule IV में शामिल किया गया है। शर्तें पहले जैसी ही हैं — अकाउंट होल्डर को FEMA के तहत "person resident outside India" होना चाहिए और अकाउंट RBI की अनुमति के मुताबिक संचालित होना चाहिए। सिर्फ धारा नंबर बदला है, छूट की मूल भावना नहीं।
NRO Account: इस पर मिलने वाला ब्याज और भारत-स्रोत की कोई भी अन्य आय पूरी तरह टैक्सेबल मानी जाती है, चाहे राशि कितनी भी छोटी क्यों न हो। बैंक इस पर TDS काटते हैं — यह प्रावधान पुराने Income Tax Act, 1961 की धारा 195 के तहत आता था, जिसे नए Income-tax अधिनियम, 2025 की धारा 393(2) [Table की क्रम संख्या 17] के तहत रखा गया है। आमतौर पर बैंक NRO ब्याज पर 30% + लागू सरचार्ज + 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस की दर से TDS काटते हैं, हालांकि आपकी कुल आय और सरचार्ज स्लैब के हिसाब से असल प्रभावी दर घट-बढ़ सकती है। चूंकि यह दर हर साल के Finance Act से तय होती है, इसलिए सटीक मौजूदा दर के लिए अपने बैंक या Chartered Accountant से ज़रूर पुष्टि कर लें।
अगर आपके निवास वाले देश और भारत के बीच Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) है, तो Tax Residency Certificate (TRC) और Form 10F जमा करके आप कम दर पर TDS कटवा सकते हैं। साथ ही, अगर साल के अंत में आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी काटे गए TDS से कम निकलती है, तो भारत में Income Tax Return (ITR) भरकर बकाया राशि का रिफंड क्लेम किया जा सकता है।
एक और उपयोगी प्रावधान भी जान लें: आयकर विभाग की आधिकारिक FAQ के मुताबिक, कुछ खास "specified investment income" पर NRI, पुरानी धारा 115E जैसी अब धारा 214 के तहत रियायती 20% टैक्स रेट का विकल्प चुन सकते हैं, जो सामान्य स्लैब दर से कम पड़ सकता है। यह प्रावधान हर तरह की NRO आय पर लागू नहीं होता, इसलिए अपनी विशेष स्थिति के लिए किसी योग्य CA से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
Repatriation Rules: पैसा विदेश कैसे भेजें
NRE Account: पूरी तरह Repatriable है। मूलधन और ब्याज, दोनों बिना किसी अधिकतम सीमा के विदेश भेजे जा सकते हैं।
NRO Account: RBI के Master Direction के अनुसार, NRO अकाउंट का बैलेंस NRI और PIO द्वारा एक वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) में अधिकतम USD 1 मिलियन तक ही विदेश भेजा जा सकता है, बशर्ते Foreign Exchange Management (Remittance of Assets) Regulations, 2016 की शर्तें पूरी हों। इसी USD 1 मिलियन की सीमा के भीतर NRO से NRE या SNRR अकाउंट में भी फंड ट्रांसफर किया जा सकता है।
यह राशि विदेश भेजने से पहले लागू टैक्स चुकाना ज़रूरी है, और इसके लिए CA से जुड़े दो फॉर्म भरने होते हैं। पहले इन्हें Form 15CA (non-resident को भुगतान की जानकारी) और Form 15CB (अकाउंटेंट का सर्टिफिकेट) कहा जाता था। आयकर विभाग की आधिकारिक Form Mapping Guide के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से नया Income-tax अधिनियम, 2025 लागू होने के बाद इन्हें अब क्रमशः Form 145 और Form 146 कहा जाता है — काम पहले जैसा ही है, सिर्फ फॉर्म नंबर बदले हैं।
एक दिलचस्प बात यह भी है कि RBI खुद टैक्स से जुड़े मामलों पर कोई स्पष्टीकरण नहीं देता — Master Direction में साफ लिखा है कि टैक्स कानूनों का पालन सुनिश्चित करना बैंकों (Authorised Dealers) की ज़िम्मेदारी है। यही वजह है कि रेमिटेंस से पहले बैंक ज़रूरी टैक्स दस्तावेज़ मांगते हैं।
Interest Rules: ब्याज दर से जुड़े नियम
NRE और NRO, दोनों अकाउंट पर ब्याज दरें RBI के Department of Regulation द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होती हैं, और हर बैंक में दरें अलग-अलग हो सकती हैं। सामान्य नियम यह है कि NRE डिपॉज़िट पर ब्याज दर उतनी ही या उससे कम रहनी चाहिए जितनी उस बैंक में समान अवधि के घरेलू (domestic) रुपी टर्म डिपॉज़िट पर मिलती है। NRO अकाउंट पर ब्याज दरें सामान्यतः वैसी ही रहती हैं जैसी resident अकाउंट पर लागू होती हैं।
ताज़ा अपडेट (जून 2026): RBI ने 17 जून 2026 को जारी सर्कुलर (RBI/2026-27/143 और संबंधित सर्कुलर) के ज़रिए विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के मकसद से एक अस्थायी राहत दी है। इसके तहत 3 साल या उससे ज़्यादा अवधि की नई/रिन्यू होने वाली NRE Term Deposit पर "घरेलू दर से ज़्यादा न होने" वाली सीमा को 30 सितंबर 2026 तक अस्थायी रूप से हटा दिया गया है — यानी बैंक इस अवधि में इन डिपॉज़िट पर पहले से ऊंची दर ऑफर कर सकते हैं। यही राहत 3 से 5 साल की FCNR(B) डिपॉज़िट पर भी लागू है। ध्यान दें: यह छूट सिर्फ नई/रिन्यू NRE डिपॉज़िट पर लागू है; NRO से NRE में ट्रांसफर की गई राशि इस छूट के दायरे में नहीं आती। चूंकि यह प्रावधान अस्थायी है, इसलिए FD खोलने से पहले अपने बैंक से मौजूदा दर और छूट की वैधता की तारीख ज़रूर जांच लें।
Joint Account Rules: संयुक्त खाता किसके साथ खोल सकते हैं
NRE Account: इसे दो या ज़्यादा NRI/PIO मिलकर जॉइंट रूप से खोल सकते हैं। इसके अलावा, एक NRI/PIO अपने resident close relative (Companies Act, 2013 में परिभाषित "relative") के साथ भी 'former or survivor' आधार पर जॉइंट अकाउंट खोल सकता है। लेकिन एक शर्त हमेशा याद रखें — जब तक मुख्य (NRI/PIO) खाताधारक जीवित है, resident relative सिर्फ Power of Attorney होल्डर के तौर पर ही अकाउंट ऑपरेट कर सकता है, प्राथमिक खाताधारक के तौर पर नहीं।
NRO Account: इसे भी दो या ज़्यादा NRI/PIO मिलकर खोल सकते हैं, या फिर resident के साथ 'former or survivor' आधार पर जॉइंट रूप से खोला जा सकता है।
Nomination Rules: नॉमिनेशन की सुविधा
RBI के Master Direction के मुताबिक, बैंक (Authorised Dealers) NRE, NRO और FCNR(B) — तीनों तरह के अकाउंट पर व्यक्तिगत खाताधारकों के लिए नॉमिनेशन सुविधा देने के लिए अधिकृत हैं। नॉमिनी भारत का resident या non-resident, दोनों में से कोई भी हो सकता है।
NRE अकाउंट के मामले में RBI का नियम स्पष्ट करता है कि खाताधारक की मृत्यु होने पर बैलेंस non-resident नॉमिनी को सीधे भेजा जा सकता है। लेकिन अगर नॉमिनी resident है और मृतक की विदेश में कोई देनदारी चुकाने जैसे किसी कारण से वह राशि विदेश भेजना चाहता है, तो इसके लिए मामला RBI के पास भेजा जाता है और उसकी मंज़ूरी ज़रूरी होती है। NRO अकाउंट पर भी यही सामान्य सिद्धांत लागू रहता है कि नॉमिनी को मिलने वाली राशि की repatriation उसी USD 1 मिलियन प्रति वित्त वर्ष की सीमा और शर्तों के अधीन होगी, जो जीवित खाताधारक पर लागू होती है।
किस व्यक्ति को कौन-सा अकाउंट चुनना चाहिए?
ज़्यादातर NRI के लिए असली सवाल "NRE या NRO" नहीं, बल्कि "NRE और NRO — कौन-सी रकम कहां रखें" होना चाहिए, क्योंकि अधिकतर NRI को असल में दोनों अकाउंट की ज़रूरत पड़ती है।
- अगर आपकी पूरी कमाई विदेश में होती है (सैलरी, बिज़नेस इनकम) और आप उसे भारत में सुरक्षित रखना चाहते हैं, साथ ही टैक्स-फ्री ब्याज और पूरी repatriability चाहते हैं — तो NRE Account सही विकल्प है।
- अगर भारत में आपकी कोई मौजूदा इनकम है — जैसे किराए पर दिया मकान, पेंशन, म्यूचुअल फंड या शेयर से डिविडेंड, या भारत में पहले से जमा FD — तो यह पैसा कानूनन सिर्फ NRO Account में ही आ सकता है, NRE में नहीं।
- अगर आप अभी-अभी भारत से विदेश शिफ्ट हुए हैं, तो अपना पुराना Resident Savings Account तुरंत NRO Account में बदलवाना अनिवार्य है — इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
- अगर आप भारत में परिवार को नियमित पैसा भेजते हैं और भविष्य में यह राशि पूरी तरह वापस विदेश भी ले जाना चाहते हैं, तो इसे NRE अकाउंट के ज़रिए भेजना बेहतर रहता है, क्योंकि इसमें भविष्य में repatriation पर कोई रोक नहीं रहती।
- अगर आपने भारत में कोई प्रॉपर्टी बेची है, तो उसकी बिक्री राशि पहले NRO अकाउंट में ही आती है, और वहां से आप शर्तों के अधीन सालाना USD 1 मिलियन तक विदेश भेज सकते हैं।
Common Mistakes: आम गलतियां जो NRI अक्सर करते हैं
- भारत की इनकम NRE अकाउंट में जमा करना — किराया, डिविडेंड या पेंशन जैसी भारत-स्रोत आय को सीधे NRE अकाउंट में जमा करना FEMA नियमों का उल्लंघन है (करंट इनकम के मामले में सिर्फ तभी अनुमति है जब बैंक टैक्स कटौती से संतुष्ट हो)।
- Resident Account को समय पर NRO में न बदलवाना — विदेश शिफ्ट होने के तुरंत बाद पुराना सेविंग्स अकाउंट NRO में बदलवाना RBI का स्पष्ट नियम है, फिर भी कई लोग इसे महीनों तक टाल देते हैं।
- यह मान लेना कि NRO का ब्याज भी टैक्स-फ्री है — यह सबसे आम गलतफहमी है। NRO पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल है और उस पर TDS कटता है।
- DTAA का फायदा न उठाना — बिना TRC और Form 10F जमा किए बैंक डिफ़ॉल्ट रूप से ऊंची दर पर TDS काटते हैं, जबकि DTAA के तहत कम दर उपलब्ध हो सकती है।
- ज़्यादा TDS कटने पर ITR न भरना — अगर वास्तविक टैक्स देनदारी TDS से कम है, तो रिफंड सिर्फ ITR भरने पर ही मिलता है।
- NRE जॉइंट अकाउंट में resident relative को प्राथमिक ऑपरेटर मान लेना — जब तक NRI/PIO जीवित है, resident relative सिर्फ Power of Attorney होल्डर के तौर पर ही अकाउंट चला सकता है।
- भारत स्थायी रूप से लौटने पर NRE अकाउंट को समय पर resident/RFC अकाउंट में न बदलवाना — निवासी स्थिति बदलते ही टैक्स छूट की शर्तें भी बदल जाती हैं।
- USD 1 मिलियन प्रति वित्त वर्ष की सीमा को नज़रअंदाज़ करना — बड़ी रकम की योजना बनाते समय रेमिटेंस को कई वित्त वर्षों में बांटकर प्लान करना पड़ सकता है।
Official FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
NRI किसे माना जाता है?
RBI के अनुसार, NRI वह भारतीय नागरिक है जो FEMA के तहत "person resident outside India" की श्रेणी में आता है — यानी जो पिछले वित्त वर्ष में 182 दिन से ज़्यादा भारत में नहीं रहा, या जो रोज़गार/व्यापार जैसी वजह से अनिश्चित अवधि के लिए भारत से बाहर रह रहा है।
क्या कोई विदेशी नागरिक (गैर-भारतीय मूल का) NRO अकाउंट खोल सकता है?
हां। RBI के नियमों के मुताबिक भारत आने वाला कोई भी विदेशी नागरिक विदेश से लाए गए फंड से NRO (current/savings) अकाउंट खोल सकता है। अगर यह अकाउंट 6 महीने से ज़्यादा नहीं चला और उसमें ब्याज के अलावा कोई और स्थानीय जमा नहीं हुई, तो भारत से जाते समय बैलेंस उसे वापस किया जा सकता है।
NRO अकाउंट से एक वित्त वर्ष में अधिकतम कितनी राशि विदेश भेजी जा सकती है?
RBI के Master Direction के अनुसार, NRI और PIO, Foreign Exchange Management (Remittance of Assets) Regulations, 2016 की शर्तों के तहत एक वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) में अधिकतम USD 1 मिलियन तक NRO बैलेंस विदेश भेज सकते हैं।
बांग्लादेश या पाकिस्तान के नागरिकों के लिए क्या नियम हैं?
RBI की आधिकारिक FAQ के मुताबिक, पाकिस्तानी नागरिकता/स्वामित्व वाले व्यक्तियों/संस्थाओं और बांग्लादेश-स्वामित्व वाली संस्थाओं को अकाउंट खोलने के लिए RBI की पूर्व अनुमति चाहिए। हालांकि, वैध वीज़ा और FRO/FRRO से जारी रेजिडेंशियल परमिट रखने वाले बांग्लादेशी नागरिक NRO अकाउंट खोल सकते हैं।
भारत स्थायी रूप से लौटने पर NRE अकाउंट का क्या होता है?
RBI के नियम के अनुसार, जिस दिन से खाताधारक की निवासी स्थिति बदलती है, उसी दिन से NRE अकाउंट को resident account के रूप में दोबारा designate करना होता है, या खाताधारक की इच्छा पर उसे RFC अकाउंट में ट्रांसफर करना होता है।
रेमिटेंस के लिए ज़रूरी Form 15CA और 15CB अब किस नाम से जाने जाते हैं?
आयकर विभाग की आधिकारिक Form Mapping Guide के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से लागू नए Income-tax अधिनियम, 2025 में Form 15CA का स्थान Form 145 ने और Form 15CB का स्थान Form 146 ने ले लिया है।
निष्कर्ष
NRE और NRO Account, दोनों अलग-अलग ज़रूरतें पूरी करने के लिए बनाए गए हैं — एक विदेशी कमाई को सुरक्षित और टैक्स-फ्री रखने के लिए, दूसरा भारत में मौजूद इनकम को कानूनी तरीके से मैनेज करने के लिए। सही अकाउंट का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कमाई कहां से आ रही है, न कि सिर्फ इस पर कि आप फिलहाल कहां रहते हैं।
चूंकि RBI और आयकर विभाग समय-समय पर इन नियमों — ब्याज दर की सीमा, TDS की दर, या repatriation से जुड़े फॉर्म — में बदलाव करते रहते हैं, जैसा कि इसी साल Income-tax अधिनियम, 2025 के लागू होने और जून 2026 की ब्याज दर छूट में देखा गया, इसलिए कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले RBI की वेबसाइट (rbi.org.in), आयकर विभाग की वेबसाइट (incometax.gov.in) या अपने बैंक और CA से मौजूदा नियमों की पुष्टि ज़रूर कर लें। यह लेख अगस्त 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

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