RBI समय-समय पर banking और financial services से जुड़े नियमों में बदलाव करता है। इन बदलावों का असर bank account, KYC, loan, deposit और customer complaint जैसी रोज़मर्रा की सेवाओं पर पड़ सकता है। लेकिन हर वेबसाइट पर चल रही "RBI का नया rule" वाली खबर असल में किसी आधिकारिक notification पर आधारित नहीं होती।
इस article में सिर्फ वही updates शामिल हैं जिन्हें RBI की अपनी official notifications, circulars, Master Directions या Ministry of Finance के बयानों से verify किया जा सका है। Last Updated: सितंबर 2026.
RBI New Rules: Latest Updates
| RBI Update | क्या बदला? | किस पर असर? | Status |
|---|---|---|---|
| बैंक अकाउंट/लॉकर में नॉमिनेशन | अब एक अकाउंट/लॉकर पर 4 नॉमिनी तक रखे जा सकते हैं | सभी bank customers | 🟢 लागू (1 नवंबर 2025 से) |
| Low-Risk ग्राहकों के लिए Re-KYC में छूट | KYC due होने के बावजूद transactions जारी रह सकते हैं, अपडेट के लिए अतिरिक्त समय | Low-risk श्रेणी के bank customers | 🟢 लागू (12 जून 2025 से प्रभावी) |
| Floating-Rate Loan पर Prepayment Charge समाप्त | Individuals और eligible MSEs के floating-rate loans पर कोई foreclosure/prepayment charge नहीं | Home/personal/business loan लेने वाले individuals, MSEs | 🟢 लागू (1 जनवरी 2026 से sanctioned/renewed loans पर) |
| RB-IOS 2026 (नया Ombudsman Scheme) | शिकायत निपटान का नया framework, ज्यादा compensation limit | बैंक/NBFC/payment entities के सभी ग्राहक | 🟢 लागू (1 जुलाई 2026 से) |
| Responsible Business Conduct — "Dark Patterns" और Forced Bundling पर रोक | बैंकों/NBFCs को भ्रामक digital design और जबरन bundling बंद करनी होगी | बैंक, NBFC, AIFI, SFB, Payments Bank, RRB, UCB ग्राहक | 🟡 घोषित/आगामी (1 जनवरी 2027 से लागू होगा) |
Bank Account और Nomination से जुड़ा Latest RBI Update
क्या बदला? पहले किसी भी bank account, फिक्स्ड डिपॉज़िट या locker/safe custody के लिए सिर्फ एक ही नॉमिनी रखा जा सकता था। अब Banking Laws (Amendment) Act, 2025 और उसके तहत जारी RBI की Nomination Facility Directions, 2025 के अनुसार, एक ग्राहक अपने deposit account, FD या locker के लिए अधिकतम 4 नॉमिनी तक रख सकता है।
नया नियम कब से लागू है? Banking Laws (Amendment) Act, 2025 को 15 अप्रैल 2025 को अधिसूचित किया गया था, लेकिन नॉमिनेशन से जुड़े प्रावधान विशेष रूप से 1 नवंबर 2025 से लागू हुए (Ministry of Finance का बयान, 23 अक्टूबर 2025)।
किस पर लागू है? सभी banks—Public Sector, Private, Regional Rural और Co-operative Banks—पर, और सभी तरह के deposit accounts, FD, locker व safe custody articles पर।
पहले क्या था, अब क्या बदला? पहले सिर्फ एक नॉमिनी की अनुमति थी। अब deposit accounts के लिए ग्राहक नॉमिनी को "simultaneous" (एक साथ, हिस्सा तय करके) या "successive" (प्राथमिकता क्रम में) तरीके से नामित कर सकता है। Locker/safe custody के लिए नॉमिनेशन का तरीका कुछ अलग है—इसकी सटीक प्रक्रिया अपनी बैंक शाखा से जरूर पूछें।
आम ग्राहक पर क्या असर पड़ेगा? Claim settlement यानी खाताधारक की मृत्यु के बाद पैसे या locker के सामान परिवार को मिलने की प्रक्रिया अब ज्यादा लचीली और स्पष्ट हो गई है, जिससे विवाद कम होने की उम्मीद है।
ग्राहक को क्या करना चाहिए? अपनी बैंक शाखा जाकर या नेट बैंकिंग के जरिए नया नॉमिनेशन फॉर्म भरकर मौजूदा नॉमिनेशन अपडेट करें—पुराना (एक नॉमिनी वाला) नॉमिनेशन अपने आप 4 में नहीं बदलता, इसके लिए ग्राहक को खुद पहल करनी होगी।
Official Source: Banking Laws (Amendment) Act, 2025; Ministry of Finance प्रेस विज्ञप्ति (23 अक्टूबर 2025); RBI Nomination Facility in Deposit Accounts, Safe Deposit Lockers and Articles kept in Safe Custody with the Banks) Directions, 2025
KYC और Re-KYC का Latest RBI Update
क्या बदला? RBI ने Know Your Customer (KYC) Master Direction, 2016 में संशोधन करते हुए low-risk श्रेणी के व्यक्तिगत ग्राहकों को राहत दी है। अगर किसी low-risk ग्राहक की periodic KYC अपडेट due हो चुकी है, तो बैंक उसे अकाउंट में लेन-देन जारी रखने देगा, बशर्ते KYC एक तय समयसीमा के भीतर पूरी कर ली जाए।
नया नियम कब से लागू है? यह संशोधन—Reserve Bank of India (Know Your Customer (KYC)) (Amendment) Directions, 2025 (Notification No. RBI/2025-26/51, दिनांक 12 जून 2025)—तुरंत प्रभाव से लागू हुआ। इसके क्रियान्वयन (implementation) की समयसीमा बैंकों के लिए 1 जनवरी 2026 रखी गई थी।
किस पर लागू है? सिर्फ उन व्यक्तिगत ग्राहकों पर जिन्हें बैंक ने "low risk" श्रेणी में रखा है (आमतौर पर वेतनभोगी कर्मचारी, कम बैलेंस/कम लेन-देन वाले खाताधारक, सरकारी उपक्रम आदि)। High-risk या medium-risk ग्राहकों पर यह छूट लागू नहीं होती।
पहले क्या था, अब क्या बदला? पहले KYC due date निकलने पर कई बार खाते पर लेन-देन रुक जाने या प्रतिबंध लगने की शिकायतें आ रही थीं। नए नियम के अनुसार, low-risk ग्राहक अपनी KYC due date से एक साल तक, या 30 जून 2026 तक—जो भी बाद में हो—लेन-देन जारी रख सकते हैं, बशर्ते इस बीच KYC पूरी कर ली जाए।
आम ग्राहक पर क्या असर पड़ेगा? अगर आपकी periodic KYC due है और आप low-risk श्रेणी में आते हैं, तो सिर्फ इस वजह से आपका खाता तुरंत ब्लॉक नहीं होगा। लेकिन बैंक इस दौरान आपके अकाउंट पर नियमित निगरानी (monitoring) जरूर रखेगा।
ग्राहक को क्या करना चाहिए? बैंक से मिलने वाले KYC-अपडेट रिमाइंडर को नज़रअंदाज़ न करें। छूट का मतलब यह नहीं कि KYC अपडेट करानी ही नहीं है—सिर्फ इतना है कि तय समय के भीतर पूरी करने पर लेन-देन नहीं रुकेगा।
Official Source: RBI Notification No. RBI/2025-26/51 (DOR.AML.REC.30/14.01.001/2025-26), दिनांक 12 जून 2025 — Reserve Bank of India (Know Your Customer (KYC)) (Amendment) Directions, 2025
Loan और EMI से जुड़ा Latest RBI Update
क्या बदला? RBI ने floating-rate loans पर foreclosure/prepayment charges को लेकर एक व्यापक नियम जारी किया है। पहले सिर्फ individuals के non-business floating-rate loans पर ही prepayment charge की मनाही थी। अब यह छूट individuals के business-purpose floating-rate loans और eligible Micro & Small Enterprises (MSEs) तक भी बढ़ा दी गई है।
नया नियम कब से लागू है? Reserve Bank of India (Pre-payment Charges on Loans) Directions, 2025 को 2 जुलाई 2025 को जारी किया गया, और यह 1 जनवरी 2026 को या उसके बाद sanction/renew किए गए loans पर लागू है।
किस पर लागू है? Commercial banks (payment banks को छोड़कर), co-operative banks, NBFCs और All India Financial Institutions से लिए गए floating-rate loans पर—individuals (business व non-business दोनों तरह के प्रयोजन के लिए) और eligible MSE borrowers। कुछ छोटे/विशेष श्रेणी के लेंडर (जैसे कुछ Tier-1/Tier-2 सहकारी बैंक) इस दायरे से बाहर रखे गए हैं।
किस पर लागू नहीं है? Fixed-rate loans इस छूट में शामिल नहीं हैं—वहाँ lender चाहे तो prepayment charge ले सकता है, बशर्ते वह sanction letter और loan agreement में पहले से साफ-साफ बताया गया हो। साथ ही, यह नियम सिर्फ 1 जनवरी 2026 को या उसके बाद sanction/renew हुए loans पर लागू है, उससे पहले के floating-rate loans इस विशेष विस्तार में शामिल नहीं (हालाँकि individuals के non-business floating loans पर prepayment-charge-मुक्ति पहले से ही लागू थी)।
आम ग्राहक पर क्या असर पड़ेगा? Home loan, business loan या MSE loan लेने वाले व्यक्ति अब बिना किसी जुर्माने के अपना floating-rate loan समय से पहले चुका सकते हैं या बेहतर दर वाले किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर कर सकते हैं, चाहे loan किसी भी amount का हो या कोई minimum lock-in अवधि क्यों न बीती हो।
ग्राहक को क्या करना चाहिए? 1 जनवरी 2026 के बाद sanction/renew हुए floating-rate loan के sanction letter और loan agreement में prepayment charge का कोई जिक्र नहीं होना चाहिए—अगर है, तो बैंक से स्पष्टीकरण मांगें।
Official Source: Reserve Bank of India (Pre-payment Charges on Loans) Directions, 2025, दिनांक 2 जुलाई 2025
RBI Complaint / Ombudsman से जुड़ा Latest Update — RB-IOS 2026
क्या बदला? RBI ने बैंक/NBFC/payment entities से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए Reserve Bank – Integrated Ombudsman Scheme, 2026 (RB-IOS 2026) जारी की है, जो पुरानी RB-IOS 2021 योजना की जगह लेती है।
नया नियम कब से लागू है? RB-IOS 2026 को 16 जनवरी 2026 को जारी किया गया और यह 1 जुलाई 2026 से प्रभाव में है।
किस पर लागू है? सभी Commercial Banks, Regional Rural Banks, State/Central Co-operative Banks, कुछ तय जमा-आकार (₹50 करोड़ या अधिक) वाले Primary (Urban) Co-operative Banks, NBFCs और payment system operators के ग्राहकों की शिकायतों पर।
पहले क्या था, अब क्या बदला? RB-IOS 2021 के तहत consequential financial loss के लिए अधिकतम ₹20 लाख और मानसिक तनाव/परेशानी/समय की बर्बादी के लिए अधिकतम ₹1 लाख compensation मिल सकता था। RB-IOS 2026 में यह सीमा बढ़ाकर क्रमशः ₹30 लाख और ₹3 लाख कर दी गई है, और अब विवाद (dispute) की कुल राशि पर भी कोई ऊपरी सीमा नहीं रखी गई है।
आम ग्राहक पर क्या असर पड़ेगा? अगर बैंक/NBFC से किसी सेवा में कमी के चलते नुकसान हुआ है, तो अब पहले से ज्यादा compensation पाने की गुंजाइश है, और बड़ी रकम के विवाद भी Ombudsman के दायरे में आ सकते हैं।
ग्राहक को क्या करना चाहिए? सबसे पहले अपनी शिकायत संबंधित बैंक/NBFC के पास दर्ज करें। अगर 30 दिन के भीतर जवाब नहीं मिलता या जवाब संतोषजनक नहीं है, तो RBI Ombudsman के पास शिकायत की जा सकती है। ध्यान रहे—1 जुलाई 2026 से पहले दर्ज शिकायतें अब भी पुरानी RB-IOS 2021 योजना के तहत ही निपटाई जाएंगी।
Official Source: Reserve Bank – Integrated Ombudsman Scheme, 2026 — RBI की आधिकारिक FAQ (rbi.org.in/commonman)
Digital Banking Update — "Dark Patterns" और Forced Bundling पर रोक (आगामी)
क्या बदला? RBI ने बैंकों, NBFCs और अन्य regulated entities के लिए Responsible Business Conduct (Second Amendment) Directions, 2026 जारी की हैं, जो digital interfaces पर "dark patterns" (ग्राहक को गुमराह करने वाले भ्रामक design) और किसी उत्पाद की बिक्री के साथ दूसरे third-party उत्पाद को जबरन जोड़ने (compulsory bundling) पर रोक लगाती हैं।
नया नियम कब से लागू है? इसका draft 11 फरवरी 2026 को जारी हुआ था, और फाइनल Directions 15 जून 2026 को अलग-अलग entity-श्रेणियों (बैंक, NBFC, All India Financial Institutions, Small Finance Banks, Payments Banks, RRBs, Urban Co-operative Banks) के लिए अलग-अलग circulars के रूप में जारी की गईं। यह नियम अब फाइनल हो चुका है, लेकिन प्रभावी होने की तारीख 1 जनवरी 2027 रखी गई है—यानी अभी लागू नहीं हुआ है।
किस पर लागू होगा: बैंकों, NBFCs, AIFIs और अन्य regulated entities द्वारा अपने या third-party वित्तीय उत्पाद बेचने के तरीके पर।
क्या-क्या शामिल है: हर उत्पाद के लिए अलग और स्पष्ट सहमति (consent) अनिवार्य होगी; किसी उत्पाद के साथ दूसरा उत्पाद जबरन बेचना प्रतिबंधित होगा; app/website पर भ्रामक design (जैसे झूठी जल्दबाज़ी दिखाना, चुपके से कोई सेवा जोड़ देना, cancel करना मुश्किल बनाना) प्रतिबंधित होगा; mis-selling की परिभाषा को व्यापक किया गया है और उसके लिए refund व्यवस्था अनिवार्य होगी।
जरूरी स्पष्टता: कुछ जगह इस नियम की effective date गलती से 1 जुलाई 2026 (जो सिर्फ draft-स्तर की प्रस्तावित तारीख थी) बताई जा रही है। फाइनल Directions में यह तारीख आगे बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 कर दी गई—यानी 22 सितंबर 2026 तक यह नियम अभी लागू नहीं हुआ है, भले ही इसका फाइनल रूप जारी हो चुका हो।
ग्राहक को क्या करना चाहिए? अभी किसी action की जरूरत नहीं—यह जानकारी रखें कि जनवरी 2027 से बैंकिंग ऐप/वेबसाइट पर जबरन bundling और भ्रामक design के खिलाफ आपके पास और मजबूत शिकायत का आधार होगा।
Official Source: RBI Responsible Business Conduct (Second Amendment) Directions, 2026 (विभिन्न entity-श्रेणियों के लिए अलग परिपत्र), दिनांक 15 जून 2026
क्या आम बैंक ग्राहक को कुछ करना होगा?
- नॉमिनेशन अपडेट करें — पुराना एक-नॉमिनी वाला फॉर्म अपने आप 4 में नहीं बदलता; बैंक जाकर या ऐप से नया फॉर्म भरें
- KYC रिमाइंडर नज़रअंदाज़ न करें — low-risk छूट सिर्फ समय देती है, KYC माफ नहीं करती
- Floating-rate loan चुकाने से पहले sanction letter जाँचें — अगर loan 1 जनवरी 2026 के बाद का है, तो prepayment charge नहीं लगना चाहिए
- शिकायत दर्ज करते समय पहले बैंक/NBFC को मौका दें — 30 दिन में जवाब न मिलने पर ही Ombudsman के पास जाएँ
- Dark Patterns/bundling वाला नियम अभी लागू नहीं — इसके लिए जनवरी 2027 तक इंतज़ार करना होगा; अभी कोई तुरंत कार्रवाई जरूरी नहीं
पहले और अब — Before vs Now
| विषय | पहले | अब | Effective Date |
|---|---|---|---|
| Nomination | अकाउंट/लॉकर पर सिर्फ 1 नॉमिनी | अकाउंट/लॉकर पर 4 नॉमिनी तक | 1 नवंबर 2025 |
| Low-risk ग्राहकों की Re-KYC | due date निकलने पर लेन-देन में दिक्कत आने की शिकायतें | due date से 1 साल तक, या 30 जून 2026 तक (जो बाद में हो), लेन-देन जारी | 12 जून 2025 |
| Floating-rate loan prepayment | सिर्फ individuals के non-business loans पर charge-मुक्ति | Individuals के business-purpose loans और MSEs तक भी विस्तार | 1 जनवरी 2026 (नए/renewed loans) |
| Ombudsman compensation | अधिकतम ₹20 लाख (नुकसान) + ₹1 लाख (परेशानी) | अधिकतम ₹30 लाख (नुकसान) + ₹3 लाख (परेशानी), dispute-value पर कोई सीमा नहीं | 1 जुलाई 2026 |
| Digital sales practices | Dark patterns/forced bundling पर कोई एकीकृत RBI-व्यापी रोक नहीं | Explicit consent अनिवार्य, dark patterns व forced bundling प्रतिबंधित | 1 जनवरी 2027 (आगामी) |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. RBI के नए नियम 2026 में क्या बदले हैं?
इस साल के सबसे अहम बदलाव हैं—bank account/locker में 4 नॉमिनी तक की अनुमति, low-risk ग्राहकों के लिए Re-KYC में राहत, floating-rate loans पर prepayment charge की समाप्ति, नया RB-IOS 2026 Ombudsman scheme, और digital banking में dark patterns/forced bundling पर आगामी रोक।
2. क्या सभी bank customers पर नए RBI rules लागू होते हैं?
नहीं, हर नियम की अपनी शर्तें हैं—जैसे Re-KYC की राहत सिर्फ "low-risk" श्रेणी के ग्राहकों पर लागू है, जबकि नॉमिनेशन और Ombudsman से जुड़े बदलाव लगभग सभी ग्राहकों पर लागू होते हैं।
3. बैंक अकाउंट में अब कितने नॉमिनी रखे जा सकते हैं?
Banking Laws (Amendment) Act, 2025 के तहत अब एक अकाउंट, FD या locker के लिए अधिकतम 4 नॉमिनी तक नामित किए जा सकते हैं—यह 1 नवंबर 2025 से लागू है।
4. Re-KYC कब तक कराई जा सकती है अगर deadline निकल चुकी है?
Low-risk ग्राहकों के लिए, KYC due date से एक साल तक या 30 जून 2026 तक—जो भी बाद में हो—लेन-देन जारी रखते हुए KYC पूरी की जा सकती है।
5. क्या floating-rate loan पर अब prepayment charge नहीं लगेगा?
1 जनवरी 2026 को या उसके बाद sanction/renew हुए floating-rate loans पर, individuals और eligible MSEs से कोई prepayment/foreclosure charge नहीं लिया जा सकता।
6. क्या यह prepayment-charge छूट सभी तरह के लोन पर लागू है?
नहीं। यह सिर्फ floating-rate loans पर लागू है, fixed-rate loans पर नहीं, और सिर्फ 1 जनवरी 2026 के बाद sanction/renew हुए loans पर।
7. RBI Ombudsman में शिकायत करने पर कितना मुआवज़ा मिल सकता है?
RB-IOS 2026 के तहत, वास्तविक वित्तीय नुकसान के लिए अधिकतम ₹30 लाख और परेशानी/मानसिक तनाव के लिए अधिकतम ₹3 लाख तक compensation मिल सकता है।
8. RB-IOS 2026 और RB-IOS 2021 में क्या फर्क है?
RB-IOS 2026 में compensation limit बढ़ाई गई है (₹20 लाख से ₹30 लाख, ₹1 लाख से ₹3 लाख), dispute-value पर सीमा हटाई गई है, और कुछ अतिरिक्त entities को भी scheme के दायरे में लाया गया है।
9. "Dark Patterns" बैन होने का बैंक ग्राहक के लिए क्या मतलब है? क्या यह अभी लागू है?
इसका मतलब है कि बैंकिंग ऐप/वेबसाइट पर ग्राहक को गुमराह करने वाले भ्रामक design और जबरन product bundling पर रोक लगेगी। हालाँकि, यह नियम फाइनल हो चुका है लेकिन अभी लागू नहीं है—यह 1 जनवरी 2027 से प्रभाव में आएगा।
10. क्या UPI users के लिए RBI ने कोई नया rule बनाया है?
इस article के लिए की गई research में फिलहाल ऐसा कोई genuinely नया, आधिकारिक रूप से verified RBI-specific (NPCI के operational बदलावों से अलग) rule नहीं मिला जिसे यहाँ शामिल किया जा सके।
11. क्या पुराने नॉमिनेशन अपने आप 4 नॉमिनी वाले नए फॉर्मेट में बदल जाएंगे?
नहीं, मौजूदा एक-नॉमिनी वाला नॉमिनेशन अपने आप अपडेट नहीं होता—ग्राहक को खुद बैंक जाकर या ऐप के जरिए नया नॉमिनेशन फॉर्म भरना होगा।
12. RBI के नए नियमों की official जानकारी कहाँ मिलेगी?
RBI की आधिकारिक वेबसाइट rbi.org.in के Press Releases, Notifications और Master Directions सेक्शन में, और आम ग्राहकों के लिए rbi.org.in/commonman सेक्शन में।
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Official Sources
- Reserve Bank of India — Nomination Facility in Deposit Accounts, Safe Deposit Lockers and Articles kept in Safe Custody with the Banks) Directions, 2025; Banking Laws (Amendment) Act, 2025
- Reserve Bank of India — Notification No. RBI/2025-26/51 (DOR.AML.REC.30/14.01.001/2025-26), दिनांक 12 जून 2025 (KYC Amendment Directions, 2025)
- Reserve Bank of India — Pre-payment Charges on Loans Directions, 2025, दिनांक 2 जुलाई 2025
- Reserve Bank of India — Reserve Bank – Integrated Ombudsman Scheme, 2026 और इसका आधिकारिक FAQ (rbi.org.in/commonman)
- Reserve Bank of India — Responsible Business Conduct (Second Amendment) Directions, 2026 (बैंक/NBFC/AIFI-विशिष्ट परिपत्र), दिनांक 15 जून 2026
- Ministry of Finance — नॉमिनेशन प्रावधानों के प्रभावी होने संबंधी बयान, 23 अक्टूबर 2025
नोट: यह article सामान्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत बैंकिंग या वित्तीय सलाह नहीं। अपने विशेष मामले के लिए संबंधित बैंक या RBI की आधिकारिक वेबसाइट से नवीनतम जानकारी जरूर जाँच लें, क्योंकि RBI के नियम समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं।

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